Dhai Aakhar - Poetry of Life

Arisudan Yadav

“You can cut all the flowers but you cannot keep Spring from coming”, said Pablo Neruda once. Taking a cue from Kabir’s Dhai Aakhar or two and a half letters of life’s wisdom, we bring to you this Hindi Poetry podcast to recite and talk about the poetry of life, hope, beauty, courage, and motivation. Not all songs need to born from saddest thought. There is always a tomorrow to make up for yesterday. So, let there be poetry about what’s good in the world. In this podcast, we will read poems on Ashavaad, Shringar Ras, Veer Ras, of clouds, of birdsongs, of morning dew drops. Do suggest your favorite poetry that we can read here. Welcome your thoughts and review :-) Let’s connect on Instagram @_ibnBatuta read less
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कनुप्रिया 10: इतिहास - समुद्र स्वप्न और समापन - धर्मवीर भारती (Kanupriya - Dharmvir Bharati)
13-05-2023
कनुप्रिया 10: इतिहास - समुद्र स्वप्न और समापन - धर्मवीर भारती (Kanupriya - Dharmvir Bharati)
Kanupriya (कनुप्रिया) - a mesmerizing poetic story of Radha's love for Krishna and her questions, written by Dharmvir Bharati.In the previous episode, we read Itihaas - Amangal Chhaya, Prashan aur Shabd. In this episode, we are reading the last part - Itihaas (इतिहास) - Samudra Swapna aur Samapan (समुद्र स्वप्न और समापन) . You can read an analysis and the script on my blog here.धर्मवीर भारती के शब्दों में – राधा आज उसी अशोक वृक्ष के नीचे, उन्हीं मंजरियों से अपनी कंवारी मांग भरे खड़ी है - इस प्रतीक्षा में कि जब महाभारत की अवसान वेला में अपनी अठारह अक्षोहिणी सेना के विनाश के बाद निरीह, एकाकी और आकुल कृष्ण किसी भूले हुए आँचल की छाया में विश्राम पाने लौटेंगे तो वह उन्हें अपने वक्ष में शिशु सा लपेट लेगी। तो चलिए सुनते हैं कनुप्रिया का अगला हिस्सा – इतिहास - विप्रलब्धा, सेतु और आम के नीचे...You can connect with me on www.arisudan.comCredits: Kanupriya book written by Dharmvir Bharati, published by: Bhartiya Jnanpeeth#Kanupriya #DharmvirBharti #Kavita #Hindi #Poetry
कनुप्रिया 9: इतिहास - अमंगल छाया, एक प्रश्न और शब्द - धर्मवीर भारती (Kanupriya - Dharmvir Bharati)
13-05-2023
कनुप्रिया 9: इतिहास - अमंगल छाया, एक प्रश्न और शब्द - धर्मवीर भारती (Kanupriya - Dharmvir Bharati)
Kanupriya (कनुप्रिया) - a mesmerizing poetic story of Radha's love for Krishna and her questions, written by Dharmvir Bharati.In the previous episode, we read Itihaas - Vipralabdha - Setu. In this episode, we are reading the fourth part - Itihaas (इतिहास) - Amangal Chhaya, Ek Prashn, Shabd (अमंगल छाया, एक प्रश्न और अर्थहीन शब्द). You can read an analysis and the script on my blog here.धर्मवीर भारती के शब्दों में – राधा आज उसी अशोक वृक्ष के नीचे, उन्हीं मंजरियों से अपनी कंवारी मांग भरे खड़ी है - इस प्रतीक्षा में कि जब महाभारत की अवसान वेला में अपनी अठारह अक्षोहिणी सेना के विनाश के बाद निरीह, एकाकी और आकुल कृष्ण किसी भूले हुए आँचल की छाया में विश्राम पाने लौटेंगे तो वह उन्हें अपने वक्ष में शिशु सा लपेट लेगी। तो चलिए सुनते हैं कनुप्रिया का अगला हिस्सा – इतिहास - विप्रलब्धा, सेतु और आम के नीचे...You can connect with me on www.arisudan.comCredits: Kanupriya book written by Dharmvir Bharati, published by: Bhartiya Jnanpeeth#Kanupriya #DharmvirBharti #Kavita #Hindi #Poetry
कनुप्रिया 8: इतिहास - विप्रलब्धा, सेतु, आम के नीचे - धर्मवीर भारती (Kanupriya - Dharmvir Bharati)
10-11-2022
कनुप्रिया 8: इतिहास - विप्रलब्धा, सेतु, आम के नीचे - धर्मवीर भारती (Kanupriya - Dharmvir Bharati)
Kanupriya (कनुप्रिया) - a mesmerizing poetic story of Radha's love for Krishna and her questions, written by Dharmvir Bharati.In the previous episode, we read Srishti Sankalp - Kelisakhi. In this episode, we are reading the fourth part - Itihaas (इतिहास) - Vipralabdha, Setu, Aam ke Neeche (विप्रलब्धा, सेतु और आम के नीचे). You can read an analysis and the script on my blog here.धर्मवीर भारती के शब्दों में – राधा आज उसी अशोक वृक्ष के नीचे, उन्हीं मंजरियों से अपनी कंवारी मांग भरे खड़ी है - इस प्रतीक्षा में कि जब महाभारत की अवसान वेला में अपनी अठारह अक्षोहिणी सेना के विनाश के बाद निरीह, एकाकी और आकुल कृष्ण किसी भूले हुए आँचल की छाया में विश्राम पाने लौटेंगे तो वह उन्हें अपने वक्ष में शिशु सा लपेट लेगी। तो चलिए सुनते हैं कनुप्रिया का अगला हिस्सा – इतिहास - विप्रलब्धा, सेतु और आम के नीचे...You can connect with me on www.arisudan.comCredits: Kanupriya book written by Dharmvir Bharati, published by: Bhartiya Jnanpeeth#Kanupriya #DharmvirBharti #Kavita #Hindi #Poetry
कनुप्रिया 7: केलिसखी - सृष्टि संकल्प - धर्मवीर भारती (Kanupriya - Dharmvir Bharati)
08-09-2022
कनुप्रिया 7: केलिसखी - सृष्टि संकल्प - धर्मवीर भारती (Kanupriya - Dharmvir Bharati)
Kanupriya (कनुप्रिया) - a mesmerizing poetic story of Radha's love for Krishna and her questions, written by Dharmvir Bharati. In the previous episode, we read Srishti Sankalp - Aadim Bhay (आदिम भय). In this episode, we are reading the second poem of the third part - Srishti Sankalp (सृष्टि संकल्प) - Kelisakhi (केलिसखी). You can read an analysis of the poem on my blog here.धर्मवीर भारती के शब्दों में – राधा आज उसी अशोक वृक्ष के नीचे, उन्हीं मंजरियों से अपनी कंवारी मांग भरे खड़ी है - इस प्रतीक्षा में कि जब महाभारत की अवसान वेला में अपनी अठारह अक्षोहिणी सेना के विनाश के बाद निरीह, एकाकी और आकुल कृष्ण किसी भूले हुए आँचल की छाया में विश्राम पाने लौटेंगे तो वह उन्हें अपने वक्ष में शिशु सा लपेट लेगी। तो चलिए सुनते हैं कनुप्रिया का अगला हिस्सा – सृष्टि संकल्प - केलिसखी...Play next episode here.You can connect with me on www.arisudan.comCredits:Kanupriya book written by Dharmvir Bharati, published by: Bhartiya Jnanpeeth#Kanupriya #DharmvirBharti #Kavita #Hindi #Poetry
कनुप्रिया 6: आदिम भय - धर्मवीर भारती (Kanupriya - Dharmvir Bharati)
06-08-2022
कनुप्रिया 6: आदिम भय - धर्मवीर भारती (Kanupriya - Dharmvir Bharati)
Kanupriya (कनुप्रिया) - a poetic story of Radha's love for Krishna and her questions, written by Dharmvir Bharati. In the previous episode, we covered Srishti Sankalp - Srijan Sangini (सृष्टि संकल्प - सृजन संगिनी).In this episode, we are reading the second poem of the third part - Srishti Sankalp (सृष्टि संकल्प) - Aadim Bhay (आदिम भय). You can read an analysis of the poem on my blog here.धर्मवीर भारती के शब्दों में – राधा आज उसी अशोक वृक्ष के नीचे, उन्हीं मंजरियों से अपनी कंवारी मांग भरे खड़ी है - इस प्रतीक्षा में कि जब महाभारत की अवसान वेला में अपनी अठारह अक्षोहिणी सेना के विनाश के बाद निरीह, एकाकी और आकुल कृष्ण किसी भूले हुए आँचल की छाया में विश्राम पाने लौटेंगे तो वह उन्हें अपने वक्ष में शिशु सा लपेट लेगी। तो चलिए सुनते हैं कनुप्रिया का अगला हिस्सा – सृष्टि संकल्प - आदिम भयPlay next episode here.You can connect with me on www.arisudan.comCredits:Kanupriya book written by Dharmvir Bharati, published by: Bhartiya Jnanpeeth#Kanupriya #DharmvirBharti #Kavita #Hindi #Poetry
कनुप्रिया 5: सृजन संगिनी - धर्मवीर भारती (Kanupriya, Srishti Sankalp, Srijan Sangini- Dharmvir Bharati)
16-06-2022
कनुप्रिया 5: सृजन संगिनी - धर्मवीर भारती (Kanupriya, Srishti Sankalp, Srijan Sangini- Dharmvir Bharati)
Kanupriya (कनुप्रिया) - a beautiful poetic story of Radha's love for Krishna and her questions, written by Dharmvir Bharati. In the previous episode, we covered Manjari Parinay - Tum Mere Kaun Ho (मंजरी परिणय - तुम मेरे कौन हो).In this episode, we are reading the first poem of the third part - Srishti Sankalp (सृष्टि संकल्प) - Srijan Sangini (सृजन संगिनी). You can read an analysis of the poem on my blog here.धर्मवीर भारती के शब्दों में – राधा आज उसी अशोक वृक्ष के नीचे, उन्हीं मंजरियों से अपनी कंवारी मांग भरे खड़ी है - इस प्रतीक्षा में कि जब महाभारत की अवसान वेला में अपनी अठारह अक्षोहिणी सेना के विनाश के बाद निरीह, एकाकी और आकुल कृष्ण किसी भूले हुए आँचल की छाया में विश्राम पाने लौटेंगे तो वह उन्हें अपने वक्ष में शिशु सा लपेट लेगी। तो चलिए सुनते हैं कनुप्रिया का अगला हिस्सा – सृष्टि संकल्प - सृजन संगिनी Play next episode here.You can connect with me on www.arisudan.comCredits:Kanupriya book written by Dharmvir Bharati, published by: Bhartiya Jnanpeeth#Kanupriya #DharmvirBharti #Kavita #Hindi #Poetry
कनुप्रिया 4: तुम मेरे कौन हो - धर्मवीर भारती (Kanupriya - Tum Mere Kaun Ho - Dharmvir Bharati)
08-04-2022
कनुप्रिया 4: तुम मेरे कौन हो - धर्मवीर भारती (Kanupriya - Tum Mere Kaun Ho - Dharmvir Bharati)
Kanupriya (कनुप्रिया) - a beautiful poetic story of Radha's love for Krishna and her questions, written by Dharmvir Bharati. In the previous episode, we read - Manjari Parinay (मंजरी परिणय) - Amra-Baur ka Arth (आम्र बौर का अर्थ).In this episode, we are reading - Manjari Parinay (मंजरी परिणय) - Tum Mere Kaun Ho (तुम मेरे कौन हो). You can read an analysis of the poem on my blog here.धर्मवीर भारती के शब्दों में – राधा आज उसी अशोक वृक्ष के नीचे, उन्हीं मंजरियों से अपनी कंवारी मांग भरे खड़ी है इस प्रतीक्षा में कि जब महाभारत की अवसान वेला में अपनी अठारह अक्षोहिणी सेना के विनाश के बाद निरीह, एकाकी और आकुल कृष्ण किसी भूले हुए आँचल की छाया में विश्राम पाने लौटेंगे तो वह उन्हें अपने वक्ष में शिशु सा लपेट लेगी। तो चलिए सुनते हैं कनुप्रिया का अगला हिस्सा – मंजरी परिणय - तुम मेरे कौन हो...Play next episode here.You can connect with me on www.arisudan.comCredits: Kanupriya book written by Dharmvir Bharati, published by: Bhartiya Jnanpeeth#Kanupriya #DharmvirBharti #Kavita #Hindi #Poetry
कनुप्रिया 3: आम्र बौर का अर्थ - धर्मवीर भारती (Kanupriya - Amra Baur ka Arth - Dharmvir Bharati)
17-03-2022
कनुप्रिया 3: आम्र बौर का अर्थ - धर्मवीर भारती (Kanupriya - Amra Baur ka Arth - Dharmvir Bharati)
Kanupriya (कनुप्रिया) - a poetic story of Radha's love for Krishna and her questions, written by Dharmvir Bharati. In the previous episode, we read the second part - Manjari Parinay (मंजरी परिणय) - Amra-Baur ka Geet (आम्र बौर का गीत).In this episode, we are reading - Manjari Parinay (मंजरी परिणय) - Amra-Baur ka Arth (आम्र बौर का अर्थ). You can read an analysis of the poem on my blog here.धर्मवीर भारती के शब्दों में – राधा आज उसी अशोक वृक्ष के नीचे, उन्हीं मंजरियों से अपनी कंवारी मांग भरे खड़ी ह इस प्रतीक्षा में कि जब महाभारत की अवसान वेला में अपनी अठारह अक्षोहिणी सेना के विनाश के बाद निरीह, एकाकी और आकुल कृष्ण किसी भूले हुए आँचल की छाया में विश्राम पाने लौटेंगे तो वह उन्हें अपने वक्ष में शिशु सा लपेट लेगी।तो चलिए सुनते हैं कनुप्रिया का अगला हिस्सा – मंजरी परिणय - आम्र बौर का अर्थ...Play next episode here.You can connect with me www.arisudan.com / or on LinkedInCredits: Kanupriya book written by Dharmvir Bharati, published by: Bhartiya Jnanpeeth#Kanupriya #DharmvirBharti #Kavita #Hindi #Poetry
कनुप्रिया 2: आम्र बौर का गीत - धर्मवीर भारती (Kanupriya Amra Baur ka Geet - Dharmvir Bharati)
10-02-2022
कनुप्रिया 2: आम्र बौर का गीत - धर्मवीर भारती (Kanupriya Amra Baur ka Geet - Dharmvir Bharati)
Kanupriya (कनुप्रिया) - a beautiful poetic story of Radha's love for Krishna and her questions, written by Dharmvir Bharati. In the previous episode, we covered the opening poem Purva-Raag (पूर्व राग).In this episode, we are reading the second part - Manjari Parinay (मंजरी परिणय) - Amra-Baur ka Geet (आम्र बौर का गीत). You can read an analysis / understanding of the poem on my blog here.धर्मवीर भारती के शब्दों में – राधा आज उसी अशोक वृक्ष के नीचे, उन्हीं मंजरियों से अपनी कंवारी मांग भरे खड़ी है इस प्रतीक्षा में कि जब महाभारत की अवसान वेला में अपनी अठारह अक्षोहिणी सेना के विनाश के बाद निरीह, एकाकी और आकुल कृष्ण किसी भूले हुए आँचल की छाया में विश्राम पाने लौटेंगे तो वह उन्हें अपने वक्ष में शिशु सा लपेट लेगी।तो चलिए सुनते हैं कनुप्रिया का दूसरा हिस्सा – मंजरी परिणय - आम्र बौर का गीत...Play next episode here.You can connect with me www.arisudan.com / or on LinkedInCredits: Kanupriya book written by Dharmvir Bharati, published by: Bhartiya Jnanpeeth#Kanupriya #DharmvirBharti #Kavita #Hindi #Poetry
कनुप्रिया 1: पूर्वराग - धर्मवीर भारती (Kanupriya Purva-Raag - Dharmvir Bharati)
25-01-2022
कनुप्रिया 1: पूर्वराग - धर्मवीर भारती (Kanupriya Purva-Raag - Dharmvir Bharati)
Kanupriya (कनुप्रिया) - a beautiful poetic story of Radha's love for Krishna and her questions, written by Dharmvir Bharati. This is the first part - Purva-Raag, which has Five poems. You can read an analysis / understanding of the poem on my blog here.धर्मवीर भारती के शब्दों में – राधा आज उसी अशोक वृक्ष के नीचे, उन्हीं मंजरियों से अपनी कंवारी मांग भरे खड़ी है इस प्रतीक्षा में कि जब महाभारत की अवसान वेला में अपनी अठारह अक्षोहिणी सेना के विनाश के बाद निरीह, एकाकी और आकुल कृष्ण किसी भूले हुए आँचल की छाया में विश्राम पाने लौटेंगे तो वह उन्हें अपने वक्ष में शिशु सा लपेट लेगी।तो चलिए सुनते हैं कनुप्रिया का पहला हिस्सा – पूर्व राग का पहला गीत... Play next episode here.You can connect with me www.arisudan.com / or on LinkedInCredits:Kanupriya book written by Dharmvir Bharati, published by: Bhartiya Jnanpeeth#Kanupriya #DharmvirBharti #Kavita
अंधेरे का दीपक, बच्चन / Andhere ka Deepak, Bachchan
13-01-2022
अंधेरे का दीपक, बच्चन / Andhere ka Deepak, Bachchan
We start with a poem that serves as a warning message on Corona pandemic. The title of the poem is – “Mat Nikal” (मत निकल - Don’t go out), a poem written by Sharad Gupta but wrongly recognized as one written by Harivansh Rai Bachchan, probably because of its similarity with Agnipath (अग्निपथ). Every word of the poem is spot on for today's situation, sample this:संतुलित व्यवहार कर, बन्द तू किवाड़ करघर में बैठ, इतना भी तू ना मचलमत निकल, मत निकल, मत निकल Then we read a poem written by Harivansh Rai Bachchan – Andhere ka Deepak (अंधेरे का दीपक - a lamp in the dark). This is a poem of optimism and hope, which gives a message of lighting a lamp however dark one’s time may get. A ray of hope in the face of difficult and changing times. Some hard-hitting lines, such as these:किन्तु ऐ निर्माण के प्रतिनिधि, तुझे होगा बताना,जो बसे हैं वे उजड़ते हैं प्रकृति के जड़ नियम से,पर किसी उजड़े हुए को फिर बसाना कब मना है?है अँधेरी रात पर दीपक जलाना कब मना है? Welcome to the firstDhai Aakhar – a Poetry Podcast”. This is a podcast of upbeat Hindi Poems about hope, life and optimism.We have one more Podcast, exclusively about the stories and poetry of Bachchan’s Madhushala. Please check out here. Don't forget to leave a review on Apple iTunes.Thanks for listening :-) stay safe. You can connect with me:Instagram | Facebook | YouTube | www.arisudan.com Credits:Poems written by Sharad Gupta and Dr Harivansh Rai Bachchanpi e
है अमित सामर्थ्य मुझ में, अज्ञात / Jobs of the Future, Hai Amit Samarthya, Anonymous
14-09-2021
है अमित सामर्थ्य मुझ में, अज्ञात / Jobs of the Future, Hai Amit Samarthya, Anonymous
We start by discussing the Jobs of the Future (World Economic Forum), such as - Fitness Commitment Counsellor. That there are so many types of work if only we start living up to our capability. The poem inspires one to realize that potential - that your capability is endless - you only have to realize that and work on it. Why beg for something when you can earn it?है अमित सामर्थ्य मुझ में, याचना मैं क्यों करूंगा... (Hai Amit Samarthya Mujh Mein - Yachana Main Kyon Karunga)This poem is a tribute to Dr. Udisha Sharma, who was a great poetess, a teacher and very knowledgeable in voice and music. Her untimely departure from the world has left many of us in shock and disbelief. You can find some of her poems on YouTube: https://bit.ly/3cBQcIuWelcome to Dhai Aakhar - 4th episode. This is a podcast of upbeat Hindi Poems about hope, life and optimism. I host one more podcast on "Bachchan’s Madhushala". Listen here: https://spoti.fi/2TaCqpDJoin us for an online chit-chat on poetry on our meetup group here: https://bit.ly/3f0ZSxPOther links to connect:Apple: https://apple.co/3hlGhGPInstagram: https://bit.ly/3hDyOXcFacebook: https://bit.ly/3f46UCkLinkedin: https://bit.ly/2T8CZApYouTube: https://bit.ly/342wYHzClubhouse: https://www.joinclubhouse.com/@arisudanwww.arisudan.com  Credits: Poet of this poem is unknown, please let me know if you know.